नैनन चलावेली बान

ले भौंहन क तीर कमान

नैनन ! नैनन चलावेली बान।

 

रति सी अंग अंग हौ ढारल

सोझा आइल बा, सभ हारल

भरमावै सभके धियान। नैनन—

 

साज समाज बीच जब आवे

अवते इहाँ मधुर मुसुकावे

सुघरई क छोड़े निसान। नैनन —

 

जब जब सुर में गीत सुनावे

मन के तार तार झनकावे

सांसत में डारस परान। नैनन—

 

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

Related posts

Leave a Comment